दस वर्षीय रिताल बालबीसी स्कूल खुलने का इंतजार कर रही थी, अचानक गोलियों की आवाज़ गूंज उठी।रिताल पर निशाना साधी गई गोली उसकी रीढ़ में जा लगी जिससे वह चलने से विहीन हो गई।
तीन वर्षों बाद खुलने वाले स्कूल के लिए उसने अपना बैग और कपड़े भी पहले ही तैयार किए थे।
अब वह अपनी कक्षा में लौटने की जगह मजबूरी में घर पर बैठकर पढ़ाई करती है।उसकी मां हतीजा बालबीसी घंटों कार खोजने के बाद तीन पहिया मोटर साइकिल पर अस्पताल पहुंचीं।
डॉक्टरों ने उसके जीवित बच जाने पर हैरानी जताई, शरीर में कई जगह छर्रे रह गए।रिताल की मां, इलाज के लिए उसे गाज़ा के बाहर ले जाने की इजाज़त मिलने की मांग कर रही हैं।
