संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में कहा गया, कृत्रिम बुद्धिमत्ता पूरी मानवता जितना पानी इस्तेमाल करेगी।दो हज़ार तीस तक कृत्रिम बुद्धिमत्ता की ऊर्जा मांग दोगुनी होने की संभावना जताई गई।

इन प्रणालियों द्वारा उपयोग की जाने वाली बिजली दुनिया की कुल खपत का तीन प्रतिशत होगी।

यह मात्रा अभी इंग्लैंड के कार्बन उत्सर्जन और विश्व की पीने योग्य जल आवश्यकता के बराबर है।विशेषज्ञों ने चेताया कि दक्षता बढ़ने पर भी समग्र ऊर्जा और जल उपभोग और बढ़ सकता है।

रिपोर्ट में नीति निर्माण हेतु पारदर्शिता, समावेशिता और वैश्विक सहयोग को ज़रूरी बताया गया।वर्तमान में डेटा केंद्र सऊदी अरब जितनी ऊर्जा खपत करते हैं, अमेरिका-चीन तकनीकी रूप से आगे हैं।