वैश्विक मांस खपत बीते साठ वर्षों में चार गुना बढ़ गई है, रिपोर्ट में खुलासा हुआ।साल उन्नीस सौ इकसठ में इंसान छः गुना कम चिकन और आधा पोर्क मांस खाते थे।

उस दौर में हर इंसान तीन किलोग्राम से कम चिकन और पच्चीस किलोग्राम कुल मांस खाता था।

वर्ष दो हज़ार बाईस में वार्षिक चिकन खपत सत्रह किलोग्राम और कुल मांस सेवन सैंतालिस किलोग्राम हुआ।रिपोर्ट में बताया गया कि चौदह प्रतिशत मांस और दूध उपभोक्ता तक पहुँचे बिना नष्ट हो जाता है।

पशुपालन से निकलने वाले गैस उत्सर्जन अगले दशक में सात दशमलव छह प्रतिशत तक बढ़ने की आशंका है।वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी कि बढ़ती खपत और असमानता, जलवायु संकट तथा जैव विविधता को प्रभावित कर रही।