वैज्ञानिकों ने पाया कि पृथ्वी की घूर्णन गति सुस्त हो रही है, जिससे दिन लंबा महसूस होने लगा।पिछले बीस वर्षों में दिन की लंबाई औसतन एक पूर्ण मिलीसेंकड बढ़ चुकी है।
मिलीसेंकड के इस बदलाव से आम इंसान को फर्क नहीं पड़ता, पर तकनीकी सिस्टम प्रभावित होते।
वैज्ञानिक लगातार ये अंतर मापते हैं, ताकि समय आधारित प्रणाली में कोई खामी न आए।ग्लेशियर पिघलने से जल वितरण बदलता है, इससे पृथ्वी की घूर्णन गति में मामूली अंतर आता।
जीपीएस, सेटेलाइट, नेविगेशन जैसी प्रणालियाँ पृथ्वी की गति में आये बेहद छोटे बदलावों पर निर्भर।वैज्ञानिक मानते हैं कि लगातार बढ़ती गर्मी से पृथ्वी के घूर्णन में भी स्पष्ट असर पड़ सकता है।
