सेवा क्षेत्र में गतिविधियाँ कम हों रहीं और मांग कमजोर बनी रही, मई में भी यही रुख चला।ऊर्जा लागत में बढ़ोतरी व कमजोर मांग के कारण सेवा क्षेत्र में कमजोरी लगातार बढ़ रही है।

मई का पीएमआई अंकतालीस दशमलव एक रहा, जिससे संकुचन का सिलसिला लगातार दूसरा महीना रहा।

अर्थशास्त्रियों के अनुसार पचास से ऊपर पीएमआई विस्तार, नीचे संकुचन का सूचक समझा जाता है।नई ऑर्डरों और व्यावसायिक गतिविधियों की गिरावट कुछ कम हुई, जिससे थोड़ी उम्मीद बनी हैं।

ऊर्जा लागत और अस्थिरता के चलते बाज़ार विश्वास अभी भी मध्य पूर्व युद्ध से पहले जितना नहीं है।विशेषज्ञों ने कहा, यदि यही रुख रहा तो दूसरी तिमाही में अर्थव्यवस्था में गिरावट दिख सकती है।